गोरखनाथ जी की आरती (Gorakhnath ji ki aarti)
जय गोरख देवाजय गोरख देवा।कर कृपा मम ऊपरनित्य करूं सेवा॥ शीश जटा अतिसुन्दर भाल चन्द्र सोहे।कानन कुण्डल झलकतनिरखत मन मोहे॥ गल सेली विच नाग सुशोभिततन भस्मी धारी।आदि पुरुषयोगीश्वर सन्तन हितकारी॥ नाथ निरंजन आप हीघट-घट के वासी।करत कृपा निज जन परमेटत यम फांसी॥ ऋद्धि सिद्धि चरणों मेंलोटत माया है दासी।आप अलख अवधूताउत्तराखण्ड वासी॥ अगम अगोचर अकथअरूपी … Read more