श्री जगन्नाथ जी की आरती (Jagannath Ji Ki Aarti)

Jagannath Ji Ki Aarti lyrics In hindi

ॐ जय जगन्नाथ हरे, स्वामी! जय जगन्नाथ हरे।
भक्तन के हितकारी, भक्तन के हितकारी, कष्ट सदा ही टरे॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

रत्न सिंहासन सुंदर, धुर-धुर छवि छाई।
सुर-मुनि जन की मोहन, सुर-मुनि जन की मोहन, सबकी सुध बिसराई॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

ब्रह्मादिक शिव नारद, करत स्तुति भारी।
भक्तन की पीड़ा हरने, भक्तन की पीड़ा हरने, महिमा है तुम्हारी॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

नीलाचल धाम तुम्हारा, तुम हो जगदाधार।
सुभद्रा बलभद्र संग, करते भक्तों का उद्धार॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

चक्र शंख कर में, मुकुट शीश बिराजे।
सुंदर रूप तुम्हारा, भक्तों को प्यारा लागे॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

जो कोई नर गाए, प्रेम सहित गाए।
मन वांछित फल पावे, संकट दूर जाए॥
ॐ जय जगन्नाथ हरे॥

Leave a Comment